10 छोटी छोटी नैतिक कहानियाँ - Short Moral Stories In Hindi

मोरल कहानी (Moral Story) वह कहानियाँ होती हैं जो हमें जीवन में अच्छे संस्कार और नैतिक मूल्य (Moral Values) सिखाती हैं। ये कहानियाँ न केवल मनोरंजक होती हैं, बल्कि हमें सही और गलत में फर्क करना भी सिखाती हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक, हर किसी के लिए ये कहानियाँ प्रेरणादायक होती हैं।

इन कहानियों में अक्सर कोई सीख छुपी होती है, जैसे ईमानदारी, मेहनत, दयालुता, धैर्य, और दूसरों की मदद करना। निचे कई मोरल कहानी लिखी गई उसे पड़े और आनंद ले।

             नीला सियार - Short Story with Moral

चंडरव नाम का एक भूखा सियार जंगल में भटक रहा था। खाने की तलाश में वह गाँव की ओर चला गया। गलियों में घूमते हुए उस पर कुत्तों ने हमला कर दिया। जान बचाने के लिए वह दौड़ता हुआ एक धोबी के घर में घुस गया और वहाँ रखे एक बड़े ड्रम में छलांग लगा दी। ड्रम में नीला रंग घुला हुआ था। पूरी रात वहीं छुपे रहने के बाद जब वह बाहर निकला, तो देखा कि उसका पूरा शरीर नीला हो चुका था! नदी में अपनी परछाई देखकर वह खुद भी चौंक गया।


जंगल में लौटते ही बाकी जानवर उसे देखकर डर गए। उन्होंने कभी ऐसा विचित्र प्राणी नहीं देखा था। चंडरव को अपनी इस नई पहचान का फ़ायदा उठाने का ख्याल आया। उसने ऊँची आवाज़ में कहा, "मैं ब्रह्मा का दूत हूँ! मुझे तुम सबकी रक्षा के लिए भेजा गया है। अब से मैं तुम्हारा राजा हूँ!" जानवरों ने डरकर उसे जंगल का राजा मान लिया। अब चंडरव मज़े में रहने लगा। हाथी उसकी सवारी करवाते, शेर और भेड़िए उसके लिए शिकार लाते। वह रोज़ भरपेट दावत उड़ाता और बाकी बचे हुए टुकड़े जानवरों को दे देता।


कुछ दिन सब ठीक चला, लेकिन एक रात सब बदल गया। अचानक जंगल में सियारों की हुआ-हुआ सुनाई दी। चंडरव अपने असली स्वभाव से मजबूर हो गया और वह भी ज़ोर-ज़ोर से हुआ-हुआ करने लगा। जैसे ही बाकी जानवरों ने यह सुना, उन्हें उसकी सच्चाई समझ आ गई।
गुस्से से भरे जानवरों ने उसे घेर लिया। शेर, चीते और भेड़िए, जिन पर वह हुक्म चलाता था, अब उसी पर टूट पड़े। देखते ही देखते, उसकी चालाकी का अंत हो गया।

सीख: इस Short Moral Story से ये सिख मिला, झूठ ज्यादा दिन तक नहीं टिकता। अपनों को छोड़कर परायों पर भरोसा करने वाला हमेशा धोखा खाता है।

 भिखारी का आत्मसम्मान - Short Story in Hindi           

Short Moral Stories In Hindi

एक स्टेशन पर एक भिखारी बैठा था, जिसके कटोरे में पेंसिलें थीं। तभी एक युवा व्यवसायी उधर से गुजरा। उसने बिना कोई पेंसिल लिए कटोरे में 50 रुपये डाल दिए और ट्रेन में चढ़ने लगा। लेकिन दरवाजा बंद होने से पहले, वह अचानक उतरा, कुछ पेंसिल उठाई और कहा, "ये पेंसिल कीमती हैं। आखिर तुम भी एक व्यापारी हो और मैं भी।" फिर वह ट्रेन में चला गया।
कुछ सालों बाद, एक पार्टी में वही भिखारी अच्छे कपड़ों में उस व्यवसायी से मिला। उसने उसे पहचान लिया और कहा, "शायद आप मुझे भूल गए होंगे, लेकिन मैं आपको नहीं भूला।"
फिर उसने स्टेशन की उस घटना को याद दिलाया। व्यवसायी ने हैरानी से पूछा, "तुम्हें याद आ गया, लेकिन तुम यहाँ सूट-टाई में क्या कर रहे हो?"
भिखारी मुस्कुराया और बोला, "उस दिन आपने मेरे साथ दया नहीं, सम्मान से पेश आए। आपने मुझे 'व्यापारी' कहा। उसी पल मैंने ठान लिया कि मैं भीख नहीं मांगूंगा। मैंने पेंसिलें बेचनी शुरू कीं, फिर कॉपी-किताबें और आज मैं शहर का सबसे बड़ा थोक विक्रेता हूँ। आपने मेरा आत्मसम्मान लौटाया, इसके लिए दिल से धन्यवाद!"


सीख:
इस नैतिक कहानी से हमें पता चलता है, हमारे बारे में लोग क्या सोचते हैं, ये मायने नहीं रखता, बल्कि हम खुद को कैसे देखते हैं, यही हमारी ज़िंदगी बदल सकता है।

      परोपकार की ईंट - Short Hindi story          

एक समय की बात है। एक प्रसिद्ध ऋषि अपने गुरुकुल में राजकुमारों से लेकर साधारण परिवार के बच्चों तक को शिक्षा देते थे। जब शिष्यों की शिक्षा पूरी हुई, तो घर जाने से पहले ऋषि ने उन्हें आखिरी सीख देने के लिए एक दौड़ आयोजित की।  

यह कोई आम दौड़ नहीं थी—इसमें कई बाधाएँ थीं। सबसे कठिन हिस्सा था एक अंधेरी सुरंग, जहाँ नुकीले पत्थर बिखरे थे, जो पैरों में चुभकर दर्द देते थे।  

सभी शिष्यों ने दौड़ पूरी की, लेकिन कुछ ने जल्दी पूरी कर ली, जबकि कुछ को अधिक समय लगा। ऋषि ने पूछा, "ऐसा क्यों हुआ?"  

एक शिष्य बोला, "गुरुजी, कुछ लोग जल्दी से भाग निकले, कुछ संभलकर चले, लेकिन कुछ ने वह पत्थर उठाकर अपनी जेब में रख लिए ताकि बाद में आने वालों को तकलीफ न हो।"  

ऋषि मुस्कुराए और बोले, "जिन्होंने पत्थर उठाए, वे मुझे दिखाएँ।" जब शिष्यों ने जेब से पत्थर निकाले, तो यह देखकर हैरान रह गए कि वे पत्थर नहीं, बल्कि कीमती हीरे थे!  

ऋषि बोले, "मैंने ही इन्हें वहाँ रखा था। यह इनाम उन लोगों के लिए है, जिन्होंने दूसरों का भला सोचा। जीवन भी ऐसी ही दौड़ है—जो सिर्फ खुद के लिए भागते हैं, वे खाली हाथ रहते हैं, लेकिन जो दूसरों की मदद करते हैं, वही सबसे समृद्ध होते हैं।"  

सीख: इस शार्ट मोरल कहानी हमें ये सिखाती हैं, सफलता की इमारत में हमेशा परोपकार की ईंटें लगाना, क्योंकि यही सबसे अनमोल पूँजी होती है।

       कर भला तो हो भला - Short Story with Moral for kids

Short Moral Stories In Hindi

राजा रामधन अपनी प्रजा की भलाई के लिए हर समय तैयार रहते थे। उनकी दयालुता की चर्चा दूर-दूर तक होती थी। लेकिन इसी वजह से पड़ोसी राजा भीम सिंह को उनसे ईर्ष्या थी। उसने छल से राजा रामधन का राज्य छीन लिया, और उन्हें जंगल में भटकने पर मजबूर कर दिया। मगर फिर भी, लोगों के दिलों में राजा रामधन की ही जगह थी। यह देखकर भीम सिंह ने ऐलान किया कि जो भी रामधन को पकड़कर लाएगा, उसे सोने की सौ दीनार मिलेंगी।

इधर जंगल में, राजा रामधन की मुलाकात एक राहगीर से हुई। राहगीर ने उनसे राजा रामधन के राज्य का रास्ता पूछा, क्योंकि उसे अपने बीमार बेटे के इलाज के लिए मदद चाहिए थी। यह सुनकर रामधन ने बिना कुछ बताए उसे भीम सिंह के दरबार में ले जाकर कहा, "राजन, आपने मुझे पकड़ने वाले को इनाम देने का वादा किया था, अब कृपया इसे सौ दीनार दें।"

राजा भीम सिंह यह देखकर दंग रह गया। उसे अहसास हुआ कि सच में राजा रामधन कितने महान और निस्वार्थ हैं। उसने अपनी गलती स्वीकार की, रामधन को उनका राज्य लौटा दिया और भविष्य में उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।

सीख: इस Short Moral stories In Hindi ने हमें ये सिखाती हैं, जो दूसरों की भलाई करता है, अंत में उसी का भला होता है। 

गलत रास्ते का बुरा अंजाम - Hindi story 

एक गाँव में एक बूढ़ा किसान अपनी जवान पत्नी के साथ रहता था। लेकिन उसकी पत्नी उससे खुश नहीं थी और हमेशा किसी और पुरुष की तलाश में रहती थी। एक दिन, एक ठग ने उसे अकेले घूमते देखा और पीछा किया। सही मौका पाकर वह उसके पास गया और बोला, "मेरी पत्नी गुजर गई है, और मैं तुमसे बहुत प्रभावित हूँ। क्या तुम मेरे साथ चलोगी?"  

वह तुरंत तैयार हो गई, लेकिन बोली, "मेरे पति के पास बहुत पैसा है। मैं उसे और धन को साथ ले आऊँगी, ताकि हमारा भविष्य सुरक्षित रहे।"  

अगली सुबह, वह पति का सारा पैसा चुरा कर उस ठग से मिलने पहुंची। दोनों गाँव से दूर निकल गए। रास्ते में एक गहरी नदी आई। ठग ने चालाकी से कहा, "मैं पहले तुम्हारी गठरी उस पार रखता हूँ, फिर तुम्हें अपनी पीठ पर ले जाऊँगा।"  

वह मान गई। फिर ठग बोला, "तुम्हारे गहने और कपड़े भारी हैं, इन्हें भी दे दो, ताकि आसानी से नदी पार कर सकूं।" महिला ने सब कुछ उतारकर दे दिया। ठग गठरी और गहने लेकर नदी पार गया और फिर वापस ही नहीं आया।  

अब वह औरत धोखा खाकर अकेली खड़ी रह गई। उसे अपनी गलती पर बहुत पछतावा हुआ।

सीख: इस Moral Stories हमें ये सिखाया, गलत रास्ता चुनने से हमेशा बुरा अंजाम ही मिलता है।

   जिराफ़ और एक अनोखा सबक - Short Story For Children 

Very short story with moral


छठी कक्षा के बच्चे बहुत उत्साहित थे क्योंकि इस बार पिकनिक के लिए उन्हें पास के नेशनल पार्क ले जाया जा रहा था। सुबह-सुबह बस निकली और कुछ घंटों में वे पार्क पहुँच गए। वहाँ, सभी बच्चों को एक बड़ी कैंटर में बैठाया गया और गाइड उन्हें जंगल में घुमाने लगा।  

बच्चे हिरन, बंदर और कई रंग-बिरंगे पक्षियों को देखकर खुश हो रहे थे। तभी गाइड ने धीरे से कहा, "देखो, ये बहुत दुर्लभ नज़ारा है! एक मादा जिराफ़ अपने बच्चे को जन्म दे रही है!"  

सभी उत्सुकता से देखने लगे। बच्चा करीब दस फुट की ऊँचाई से ज़मीन पर गिरा और चुपचाप पड़ा रहा। तभी माँ ने अचानक उसे एक ज़ोरदार लात मारी! बच्चे हैरान रह गए।  

"अरे सर, वो अपने ही बच्चे को क्यों मार रही है?" बच्चों ने मास्टर जी से पूछा। लेकिन उन्होंने चुप रहने का इशारा किया।  

फिर जिराफ़ ने दोबारा बच्चे को लात मारी, और इस बार बच्चा डगमगाते हुए खड़ा हो गया! कुछ देर में वह खुद ही चलने लगा और माँ के साथ झाड़ियों में गायब हो गया।  

मास्टर जी मुस्कुराए और बोले,  

"बच्चों, जंगल में कमजोर जीव नहीं टिकते। अगर माँ उसे लात नहीं मारती, तो वह वहीं पड़ा रहता और कोई शिकारी जानवर उसे मार सकता था। इसी तरह, जब आपके माता-पिता आपको डाँटते हैं, तो वो आपको सजा नहीं देते, बल्कि ज़िंदगी की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहे होते हैं। इसलिए उनकी डांट को प्यार समझो, क्योंकि वही तुम्हें मजबूत बनाएगी!"

    मुफ्तखोर मेहमान - Hindi Story with Moral 

राजा के शयनकक्ष में मंदरी नाम की एक जूं रहती थी। वह रोज़ रात को चुपके से राजा का खून चूसती और फिर अपनी जगह पर छिप जाती। कई दिनों से उसका यह काम आराम से चल रहा था।  

एक दिन, अग्निमुख नाम का एक खटमल वहाँ आ पहुँचा। मंदरी ने उसे देखा और गुस्से में कहा, "ये मेरा इलाका है, यहाँ से चले जाओ!"  

लेकिन खटमल चालाक था। उसने मिठी बातें करते हुए कहा, "अरे बहन, मेहमान के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करते! मैं आज रात तुम्हारा मेहमान हूँ।"  

मंदरी को उसकी बातें सुनकर थोड़ा तरस आ गया। वह बोली, "ठीक है, तुम रुक सकते हो, लेकिन राजा को काटना मत! उसे कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए।"  

खटमल हँसा और बोला, "भला मेहमान को बिना भोजन के कैसे रखा जा सकता है? मैं थोड़ा सा खून चूस लूँगा, बस बिना दर्द दिए!"  

मंदरी ने अनमने मन से हाँ कर दी।

रात हुई, राजा सोने आया और जैसे ही वह गहरी नींद में गया, खटमल सब कुछ भूलकर राजा को जोर से काटने लगा। राजा का खून उसे इतना स्वादिष्ट लगा कि वह और ज्यादा काटने लगा।  

राजा की नींद खुल गई। उसे पूरे शरीर में तेज़ खुजली होने लगी। गुस्से में उसने सेवकों को बुलाया और कहा, "पता लगाओ, मुझे किसने काटा!"  

इतना सुनते ही चालाक खटमल बिस्तर के पाए के नीचे छिप गया। लेकिन मंदरी बेचारी चादर के कोने पर बैठी रह गई।  

सेवकों ने तुरंत उसे देख लिया, पकड़कर राजा के सामने लाए और उसे मार डाला।  

सीख:  

इस Short Moral Stories in Hindi  ने सिखाया की, अनजान लोगों पर भरोसा मत करो, वरना उनकी गलती की सज़ा तुम्हें भुगतनी पड़ेगी!

                शरारती बंदर - Short Moral Stories in Hindi

Short Moral Stories In Hindi

शहर से थोड़ी ही दूर एक मंदिर का निर्माण हो रहा था। वहाँ लकड़ी का बहुत काम था, इसलिए कई मजदूर आरी से लकड़ियाँ चीर रहे थे।  

दोपहर का समय हुआ तो सभी मजदूर खाने के लिए चले गए। जाते-जाते वे आधी कटी हुई लकड़ी में एक कीला (फट्टा) फंसा गए, ताकि बाद में उसे आसानी से चीर सकें।  

शैतानी का शौक  

थोड़ी देर बाद वहाँ बंदरों का एक झुंड कूदता-फाँदता आया। उनका सरदार बहुत समझदार था, उसने सबको चेतावनी दी, "यहाँ किसी चीज़ को मत छूना!"  

सारे बंदर पेड़ों की ओर चले गए, लेकिन एक शरारती बंदर वहीं रह गया। उसे बिना मतलब चीज़ें छेड़ने की आदत थी।  

मुसीबत खुद बुला ली! 

उसकी नज़र आधे कटे लट्ठे और उसमें फंसे कीले पर पड़ी। उसने सोचा, "अगर मैं इसे निकाल दूँ तो क्या होगा?"  

वह पूरे जोश से कीले को खींचने लगा। धीरे-धीरे कीला ढीला होने लगा। बंदर जोश में और तेज खींचने लगा, लेकिन उसे पता ही नहीं चला कि उसकी पूँछ लकड़ी के बीच फँस गई थी!  

जैसे ही उसने एक ज़ोरदार झटका मारा, कीला बाहर निकल गया और लट्ठे के दो हिस्से धड़ाम से वापस जुड़ गए—सीधे उसकी पूँछ के ऊपर!  

बंदर ज़ोर से चीख पड़ा।  

खामख़ा की शैतानी का अंजाम  

इतने में मजदूर भी वापस आ गए। बंदर ने भागने की कोशिश की, लेकिन उसकी पूँछ फँसी हुई थी। जैसे-तैसे ज़ोर लगाकर वह खुद को छुड़ाने में कामयाब हुआ, लेकिन उसकी पूँछ टूट गई!  

वह चीखता-चिल्लाता, दर्द से कराहता हुआ जंगल की ओर भाग गया।  

सीख: इस Short Moral Stories in Hindi ने सिखाया, बिना सोचे-समझे किसी चीज़ से छेड़छाड़ मत करो, वरना नुकसान उठाना पड़ सकता है!

            एकता की ताकत - Very Short Story For all

बनगिरी के जंगल में एक गुस्सैल हाथी रहता था। वह अपनी ताकत के घमंड में चूर था और रास्ते में आने वाले पेड़ों को तोड़-फोड़ चलता था। उसी जंगल में एक चिड़िया और चिड़े का छोटा-सा घोंसला था, जहां चिड़िया अपने अंडों के साथ खुश थी।

एक दिन वह हाथी उधर आ निकला। उसने अपने भारी पैरों से पेड़ को गिरा दिया। घोंसला टूट गया, अंडे बिखर गए। चिड़िया का दिल टूट गया, लेकिन वह कर भी क्या सकती थी?

तभी उसकी दोस्त कठफोड़वी वहां आई। उसने कहा, "रोने से कुछ नहीं होगा, हमें हाथी को सबक सिखाना होगा।" चिड़िया को यकीन नहीं हुआ, "हम छोटे-छोटे जीव उस विशाल हाथी से कैसे लड़ सकते हैं?"

कठफोड़वी बोली, "एक और एक मिलकर ग्यारह बनते हैं। हम मिलकर उसे हरा सकते हैं!"

वे दोनों अपने दोस्त भंवरे के पास गईं। भंवरे ने सिर हिलाया, "हाथी को सबक सिखाना जरूरी है। मेरे पास एक मेंढक दोस्त है, चलो उससे मदद लेते हैं।"

मेंढक ने उनकी बात सुनी और बोला, "मैं एक योजना बनाता हूं, रुको।"

थोड़ी देर बाद वह पानी से बाहर आया और बोला, "अगर हम सब मिलकर काम करें, तो हाथी को गिरा सकते हैं!"

योजना के मुताबिक, भंवरा हाथी के कानों के पास जाकर मीठी धुन गाने लगा। हाथी ने झूमते हुए आंखें बंद कर लीं। तभी कठफोड़वी ने झपटकर उसकी आंखें फोड़ दीं!

अंधा हाथी दर्द से तड़पने लगा। उसने इधर-उधर भागना शुरू कर दिया, जिससे वह और घायल हो गया।

अब बारी थी मेंढक की। उसने अपने सभी साथियों को इकट्ठा किया और पास के एक गहरे गड्ढे के किनारे टर्राने लगा।

प्यासा हाथी टर्राहट की दिशा में दौड़ा, क्योंकि उसे पता था कि मेंढक पानी के पास रहते हैं। जैसे ही वह गड्ढे के पास पहुंचा, मेंढकों ने और तेज टर्राना शुरू कर दिया।

अंधे हाथी ने बिना देखे छलांग लगा दी और गहरे गड्ढे में गिरकर दम तोड़ दिया।

सीख:

1. एकता में ताकत होती है।  

2. अहंकार हमेशा विनाश की ओर ले जाता है

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